रमज़ान में वाजिब नमाज़ों के बाद रोज़ाना पढ़ने की दुआ

   नीचे लिखी हुई दुआओं क़ो रमज़ान महीने में अपनी हर वाजिब नमाज़ के बाद रोज़ाना पढ़ें Pdf 2 कॉलम

             a. अल्लाहुम्मा अद'ख़िल अला    b. अल्लाहुम्मा अर'ज़ुकनी हज'जा      c. या अलीयु या अज़ीम     d. दुआए हज

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a) अल्लाहुम्मा अद'ख़िल अला  اللّهُمَّ أَدْخِلْ عَلَى

 अत्यधिक दयालु का पर्दर्शन  - ईस दुआ पर एक विस्तृत कमेंटरी देती हुई किताब

 

शेख़ अल-कफ़'अमी ने अल-मिस्बाह और अल-बलद-अल-आमीन में फ़रमाया है की, "पवित्र पैग़म्बर (स:अ:व:व) ने कहा है की जो शख्स रमज़ान के महीने में रोज़ाना अपनी वाजिब नमाज़ के बाद ईन दुआओं क़ो पढ़ेगा, उसके सारे गुनाह क़यामत तक के लिये माफ़ किये जायेंगे" :

 रियल     Mp3 A    Mp3 B   यू टयूब

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ

 बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

अल्लाहुम्मा अद्खिल अला अहलिल क़ुबू'रिस सुरूर ,

अल्लाहुम्मा अग़'नि कुल्ला फ़क़ीर,

अल्लाहुम्मा अश्बिया’-कुल्ला जा-ई-ईन

अल्लाहुम्मा अक्सू कुल्ला उर्यान ,

अल्लाहुम'मक़-ज़ि दय्ना कुल्ली मदीन,

अल्लाहुम्मा फ़र'रिज अन कुल्ली मक'रूब ,

अल्लाहुम्मा रुद'दा कुल्ला ग़रीब,

अल्लाहुम्मा फुक'का कुल्ला असीर,

अल्लाहुम्मा अस’लिह’ कुल्ला फ़ासी'दिन मिन उमूरिल मुस्लिमीन,

अल्लाहुम'मश-फ़ि कुल्ला मरीज़”,

अल्लाहुम्मा सूद'दा फ़क़'रना बी-ग़ी'नाका,

अल्लाहुम्मा गै'ईर सू-अ हालीना बी-हुस्नी हालिका,

अल्लाहुम'मक़-ज़ि अन'नद दय्ना व अग़'नीना मिनल फ़क्र

इन्नका अला कुल्ली शय-ईन क़दीर

अनुवाद

ऐ माबूद! क़ब्रों में दफ़न लोगों क़ो शादमानी अता फ़रमा, ऐ माबूद हर मोहताज क़ो गनि बना दे, ऐ माबूद! हर भूके क़ो शिकं सेर कर दे, ऐ माबूद! हर नंगे क़ो लिबास पहना दे, ऐ माबूद! हर मकरूज़ का क़र्ज़ अता कर दे, ऐ माबूद! हर मुसीबत ज़दा क़ो आसूदगी अता फ़रमा, ऐ माबूद! हर मुसाफिर क़ो वतन वापस ला, ऐ माबूद! हर क़ैदी क़ो रिहाई बख्श दे, ऐ माबूद! मुसलमानों के अमूर से हर बिगाड़ की इस्लाह फ़मा दे, ऐ माबूद! हर मरीज़ क़ो शिफ़ा ता फ़रमा, ऐ माबूद! अपनी सर्वात से हमारी मोहताजी खत्म कर दे, ऐ माबूद! हमारी बद-हाली क़ो ख़ुश'हाली में बदल दे, ऐ माबूद! हमें अपने क़र्ज़ अता करने की तौफीक़ दे, और मोहताजी से बचा ले, बेशक तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है!     

 

b) अल्लाहुम्मा अर'ज़ुकनी हज'जा  اللّهُمَّ ارْزُقْنِي حَجَّ  

सैय्यद इब्ने तावूस ब्यान करते हैं की,"ईमाम अल-सादीक़ (अ:स) और ईमाम अल-काज़िम (अ:स) ने रमज़ान में ईस दुआ क़ो हर वाजिब नमाज़ के बाद पढ़ने की ताकीद फ़रमाई है”   ".     Mp3   यू टयूब

 

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

अल्लाहुम'मर ज़ुक'नी ह’अजजा बयतिकल हराम फ़ी आमी हाज़ा व फ़ी कुल्ली आमीन मा अब'कै'तनी फ़ी युस्रिन मिनका व आफियतिन व सा-अति रिज़'कीन व ला तुखील'नी मिन तिल्कल मवा'क़ी'फ़िल करीमाती वल मशाही'दिश शरीफाह व ज़ियारती क़बरी नबी'यिका सलावातुका अलय्ही व आलीही व फ़ी जमी-इ’ हवा-इजिद दुन्या वल आखीरह फ़कुन ली अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका फ़ीमा ताक़'ज़ी व तुक़द'दिरू मिनल अम्रिल मह’तुमी फ़ी लैलातिल कदरी मिनल क़ज़ा' अ'इल लज़ी ला युरद'दू व ला युबद'दलु अन यक'तुबनी मिन हुज'जाजी बयतिकल हरामिल मब्रूरी हज्जू'हुमुल मश्कूरी सा’-युहुमुल मग़'फूरी ज़ुनूबू'हुमुल मुकफ़'फ्री अन्हुम सय्यी-आतुहुम वज-अल फ़ीमा ताक़'ज़ी व तुक़द'दिरू अन तुतीला उमरी व तुवस'सिया’ अलय्या रिज़्की व तू-अद'दिया अन्नी अमानती व दयनी आमीन या रब्बल आलामीन

अनुवाद

ऐ माबूद! ईस साल में और हर साल में मुझे अपने हुरमत वाले घर (काबा) के हज की तौफीक़ अता फ़रमा, जब तक तू मुझे ज़िंदा रखे, अपनी तरफ़ से आसानी, आराम और रिज्क़ में बढ़ोतरी अता फ़रमा, मुझे ईन बुज़ुर्गी वाले मुक़ामात और मुक़द्दस वा पाकीज़ा मज़ारों के और अपने नबी-ए-करीम (स:अ:व:व) के सब्ज़ गुम्बद की ज़्यारत करने से मरहूम न रख, तेरी रहमत हो इनपर और इनकी आल पर और दुन्या वा आख़ेरत से मुताल्लिक मेरी तमाम हाजात पूरी फ़रमा दे! ऐ माबूद! मै तुझ से सवाल करता हूँ की शबे क़द्र में तू जो यक़ीनी तौर पर तय फ़रमाता और जो मोहकम फ़ैसले करता है, की जिन में किसी क़िस्म की भी तब्दीली वा पलट नही होती इनमे मेरा नाम अपने मोहतरम घर (काबा) का हज करने वालों में लिख दे की जिनका हज तुझे मंज़ूर है और इनकी स'ई मकबूल है, इनके गुनाह बख्शे गए और इनकी खताएं मिटा दी गयीं हैं और अपनी रहमत में मेरी उमर तुलानी, मेरी रोज़ी वा रिज्क़ कुशादा फ़रमा और मुझे हर अमानत और हर क़र्ज़ अदा करने की तौफीक़ दे, ऐसा ही हो ऐ जहानों के पालने वाले!     

c) या अलीयु या अज़ीम  يَا عَلِيُّ يَا عَظِيمُ،  Mp3

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

या अलिय्यु या अज़ीम या ग़फूरू या रहीम अंतर रब्बुल अजीमुल लज़ी लाय्सा कमिस'लिही शय-उन व हुवस समी-उल बसीर व हाज़ा शःरून अज़'’ज़म'तहु व कर'रम'तहु व शर'रफ़'तहु व फ़ज”ज़ल'तहु अलाश शुहूरी व हवाश शःरुल लज़ी फ़राज़”ता सिया'महू अलय्या व शहरू रम'ज़ानल लज़ी अन्ज़लता फ़ीहिल क़ुर-आना हुदन लिन नासी व बय्यी'नातिम मिनल हुदा वल फुर'क़ान व जा-अलता फ़ीही लै'लातल कद्र व जा-अल्तहा खै'रन मिन अल्फ़ी शहर फ़ा-या ज़ल मन्नी व ला यु'मन्नू अलयका, मुन्ना अलय्या बी-फ़काकी रक़ा'बती मिनन नारी फ़ी'मन ता'मुन्नू अलय्ही व अद'खिलनिल जन्नता बी-रह’मतिका या अर'हमर राहिमीन

अनुवाद

 ऐ बुलंद्तर, ऐ बुज़ुर्गी वाले, ऐ बख्शने वाले, ऐ मेहरबान, तू ही बड़ाई वाला परवरदिगार है, के जिस के जैसी कोई चीज़ नहीं है और वो सुनने देखने वाला है और यह वो महीना है जिसे तुने बुज़ुर्गी दी इज़्ज़त अता की, बुलंदी बख्शी और सभी महीनों पर फ़ज़ीलत इनायत की है, और यह वो महीना है जिसके रोज़े तुने मुझ पर फ़र्ज़ किये हैं और वो माहे मुबारक रमज़ान है की जिस में तुने क़ुरान उतारा है, जो लोगों के लिये रहबर है, इसमें हिदायत की दलीलें और हक़ वा बातिल की तफरीक है, तुने ईस महीने में शबे क़द्र रखी और इसे हज़ार महीनों से बेहतर क़रार दिया, बस ऐ एहसान करने वाले तुझ पर एहसान नहीं किया जा सकता, तू एहसान फ़रमा मुझ पर, मेरी गर्दन आग से छुडा कर इनके साथ जिस पर तुने एहसान किया और मुझे दाखिले जन्नत फ़रमा, अपनी रहमत से ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले!

 

 

d) दुआए हज   حَجَّ     Mp3

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

अल्लाहुम्मा इन्नी बिका व मिनका अत’लुबु हा'जती व मंत अलाबा हा'जतन इलन नास फ़ा-इन्नी ला अत’लुबु हा'जती इल्ला मिनका वह’दका ला शरीका लका व अस-अलुका बी-फ़जलिका व रिज़'वानिका अन तू'सल्ली अला मुहम्मदीन व अहली बय्तिही व अन तज-अला ली फ़ी आमी हाज़ा इला बयतिकल हराम सबीलन हज'जतन मबरू'रतन मुताक़ब'बलातन ज़ाकि'यतन ख़ाली'सतन लका तक़र'रुबिहा अयनी व तरफ़ा-उ’ बिहा दराजाती व तर'ज़ुक़नी अन अग़'हुज़”ज़” अ बस’अरी व अन अह’फ़ज़ा फ़र्जी व अन अकुफ़'फ़ा बिहा अन जमी-इ’ म्हारी'मिका हत्ता ला यकूना शय-उन असर इंदी मिन ता-अतिका व खश'यतिका वल अमली बीमा अह’बब्ता वत'तर्की लीमा करिहता व नहयता अन्हु वज-अल ज़ालिका फ़ी युस्रिन व यसारिन व आफ़ि'यतिन व मा अन-अमता बिही अलय्या व अस'अलुका अन तज-अला वफ़ा'ती क़त्लन फ़ी सबीलिका तह’ता रा'यति नबी'यिका मा-अ’ औलिया-इका व अस'अलुका अन ताक़'तुला बी आ’-दा-इका व आ’-दा-अ रसूलिका अस-अलुका अन तुक्री'मणी बी-हवानी मन शिया-ता मिन ख़ल'क़िका व ला तुहिन'नी बी-करामाती अहदीन मिन औलिया-इका अल्लाहुम'मज-अल ली मा-अर रसूली सबीला हस्बियल'लाहू माशा-अल्लाह

अनुवाद

ऐ माबूद मै तेरे ही ज़रिये तुझ से अपनी हाजत तलब करता हूँ जो कोई लोगों  से तलबे हाजत करता है, क्या करे बस मै तेरे सिवा किसी से तलबे हजात नहीं करता, तू यकता है तेरा कोई साथी नहीं, और सवाल करता हूँ तुझ से ब'वास्ता तेरी अता व मेहरबानी के, यह की रहमत नाज़िल फ़रमा हज़रत मोहम्मद (स:अ:व:व) और इनके अहलेबैत पर, और मेरे लिये इसी साल में अपने मोहतरम घर काबा पहुँचने का वसीला बना दे वहाँ मुझे हज नसीब कर, जो दुरुस्त मकबूल पाकीज़ा और ख़ास तेरे ही लिये हो इससे मेरी आँखें ठंडी कर और मेरे दर्जे बुलंद फ़रमा, मुझे तौफीक़ दे की हया से आँखें नीची रखूँ, अपनी शर्मगाह की हिफ़ाज़त करूँ और तेरी हराम'करदा हर चीज़ से बच के रहूँ, यहाँ तक की मेरे नज़दीक तेरी फ़रमा'बरदारी और तेरे खौफ़ से अज़ीज़तर कोई चीज़ ना हो, जिस चीज़ क़ो तू पसंद करता है, इसपर अमल करूँ, और जिसे तुने नापसंद किया और इससे रोका है इसे छोड़ दूँ और यह ईस तरह हो की ईस में आसानी फ़रावानी वा तंदुरुस्ती हो, और इसके बाद जो भी नेमत तू मुझे अता करे और तुझ से सवाली हूँ की मेरी मौत क़ो ऐसा क़रार दे गोया मै तेरी राह में तेरे नबी के झंडे तले क़त्ल हुआ, तेरे  दोस्तों के हमराह और सवाल करता हूँ मुझे तौफीक़ दे के मै तेरे और तेरे नबी के दुश्मनों क़ो क़त्ल करूँ और सवाल करता हूँ की तू अपनी मख्लूक़ में से जिस की ख्वारी से चाहे मुझे इज़्ज़त दे लेकिन अपने प्यारों में से किसी की इज़्ज़त के मुकाबिल मुझे ज़लील ना फ़रमा! ऐ माबूद! हज़रत रसूल (स:अ:व:व) के साथ मेरा राबता क़ायेम फ़रमा, काफ़ी है मेरे लिये अल्लाह जो अल्लाह चाहे वोही होगा!     

 


3 कॉलम फोरमैट      | नजफ़ अरबी फौंट

a) अल्लाहुम्मा अद'ख़िल अला  اللّهُمَّ أَدْخِلْ عَلَى

mp3 A    mp3 B   यू टयूब     विस्तृत कमेंटरी

शेख़ अल-कफ़'अमी ने अल-मिस्बाह और अल-बलद-अल-आमीन में फ़रमाया है की, "पवित्र पैग़म्बर (स:अ:व:व) ने कहा है की जो शख्स रमज़ान के महीने में रोज़ाना अपनी वाजिब नमाज़ के बाद ईन दुआओं क़ो पढ़ेगा, उसके सारे गुनाह क़यामत तक के लिये माफ़ किये जायेंगे" :

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है

اللّهُمَّ أَدْخِلْ عَلَى أَهْلِ الْقُبُورِ السُّرُورَ،

अल्लाहुम्मा अद्खिल अला अहलिल क़ुबू'रिस सुरूर

O Allah: (please do) bring in pleasure to the inhabitants of graves (i.e. the dead).

اللّهُمَّ أَغْنِ كُلَّ فَقِيرٍ،

अल्लाहुम्मा अग़'ि कुल्ला फ़क़ीर

O Allah: (please do) enhance all poor ones.

اللّهُمَّ أَشْبِعْ كُلَّ جَائِعٍ،

अल्लाहुम्मा अश्बिया’-कुल्ला जा-ई-ईन’

O Allah: (please do) satisfy all hungry ones.

اللّهُمَّ اكْسُ كُلَّ عُرْيَانٍ،

अल्लाहुम्मा अक्सू कुल्ला उर्यान

O Allah: (please do) provide all the naked with clothes.

اللّهُمَّ اقْضِ دَيْنَ كُلِّ مَدِينٍ،

अल्लाहुम'मक़-ज़ि दय्ना कुल्ली मदीन

O Allah: (please do) help all the debtors settle their debts.

اللّهُمَّ فَرِّجْ عَنْ كُلِّ مَكْرُوبٍ،

अल्लाहुम्मा फ़र'रिज अन कुल्ली मक'रूब

O Allah: (please do) relieve all the aggrieved ones.

اللّهُمَّ رُدَّ كُلَّ غَرِيبٍ،

अल्लाहुम्मा रुद'ा कुल्ला ग़रीब

O Allah: (please do) help all the strangers to return home.

اللّهُمَّ فُكَّ كُلَّ أَسِيرٍ،

अल्लाहुम्मा फुक'ा कुल्ला असीर

O Allah: (please do) release all prisoners.

اللّهُمَّ أَصْلِحْ كُلَّ فَاسِدٍ مِنْ أُمُورِ الْمُسْلِمِينَ،

अल्लाहुम्मा अस’लिह’ कुल्ला फ़ासी'दिन मिन उमूरिल मुस्लिमीन

O Allah: (please do) rectify all the Muslims’ affairs that are wrong.

اللّهُمَّ اشْفِ كُلَّ مَرِيضٍ،

अल्लाहुम'मश-फ़ि कुल्ला मरीज़

O Allah: (please do) heal all the ailed ones.

اللّهُمَّ سُدَّ فَقْرَنَا بِغِنَاكَ،

अल्लाहुम्मा सूद'ा फ़क़'रना बी-ग़ी'नाक

O Allah: (please do) fill in our poverty with Your richness.

اللّهُمَّ غَيِّرْ سُوءَ حَالِنَا بِحُسْنِ حَالِكَ،

अल्लाहुम्मा गै'ईर सू-अ हालीना बी-हुस्नी हालिका

O Allah: (please do) change our ill manners through Your excellent manners.

اللّهُمَّ اقْضِ عَنَّا الدَّيْنَ وَأَغْنِنَا مِنَ الْفَقْرِ،

अल्लाहुम'मक़-ज़ि अन'नद दय्ना व अग़'नीना मिनल फ़क्र

O Allah: (please do) help us settle our debts and save us from poverty.

إنَّكَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ.

इन्नका अला कुल्ली शय-ईन क़दीर

verily, You have power over all things.

b) अल्लाहुम्मा अर'ज़ुकनी हज'जा  اللّهُمَّ ارْزُقْنِي حَجَّ

mp3  यू टयूब

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है

اللّهُمَّ ارْزُقْنِي حَجَّ بَيْتِكَ الْحَرَامِ

अल्लाहुम'मर ज़ुक'नी ह’अजजा बयतिकल हराम

O Allah: (please) confer upon me with the grace of pilgrimage to Your Holy House,

فِي عَامِي هذَا وَفِي كُلِّ عَامٍ

फ़ी आमी हाज़ा व फ़ी कुल्ली आम

in this year and every year

مَا أَبْقَيْتَنِي فِي يُسْرٍ مِنْكَ وَعَافِيَةٍ وَسَعَةِ رِزْقٍ،

मा अब'कै'तनी फ़ी युस्रिन मिनका व आफियतिन व सा-अति रिज़'कीन

as long as You keep me alive, with easiness, good health, and expansive sustenance from You.

وَلا تُخْلِنِي مِنْ تِلْكَ الْمَوَاقِفِ الْكَرِيمَةِ،

व ला तुखील'नी मिन तिल्कल मवा'क़ी'फ़िल करीमाती

and do not deprive me of these noble situations,

وَالْمَشَاهِدِ الشَّرِيفَةِ،

वल मशाही'दिश शरीफाह

and holy places,

وَزِيَارَةِ قَبْرِ نَبِيِّكَ صَلَوَاتُكَ عَلَيْهِ وَآلِهِ،

ज़ियारती क़बरी नबी'यिका सलावातुका अलय्ही

and visiting the tomb of Your Prophet—may Your blessings be upon him and his Household;

وَفِي جَمِيعِ حَوَائِجِ الدُّنْيَا وَالأخِرَةِ فَكُنْ لِي

व आलीही व फ़ी जमी-इ’ हवा-इजिद दुन्या वल आखीरह फ़कुन ली

and (please) stand for me in all of my needs for this worldly life and the Next World.

اللّهُمَّ إنِّي أَسْأَلُكَ فِي مَا تَقْضِي وَتُقَدِّرُ

अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका फ़ीमा ताक़'ज़ी व तुक़द'दिरू

O Allah: I beseech You regarding that which You decide and determine

مِنْ الأمْرِ الْمَحْتُومِ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ

मिनल अम्रिल मह’तुमी फ़ी लैलातिल कदरी

from the inevitable decisions that You make on the Grand Night—

مِنَ الْقَضَاءِ الَّذِي لا يُرَدُّ وَلا يُبَدَّلُ

मिनल क़ज़ा' 'इल लज़ी ला युरद'दू व ला युबद'दलु

decisions that are neither retreated nor altered—

أَنْ تَكْتُبَنِي مِنْ حُجَّاجِ بَيْتِكَ الْحَرَامِ

अन यक'तुबनी मिन हुज'जाजी बयतिकल हरामिल

that You may include me with the pilgrims to Your Holy House,

الْمَبْرُورِ حَجُّهُمُ،

अल मब्रूरी हज्जू'हुमुल

whose pilgrimage is admitted by You

الْمَشْكُورِ سَعْيُهُمُ،

अल मश्कूरी सा’-युहुमुल

and whose efforts are thankfully accepted by You,

الْمَغْفُورِ ذُنُوبُهُمُ،

अल मग़'फूरी ज़ुनूबू'हुमुल

and whose sins are forgiven by You,

الْمُكَفَّرِ عَنْهُمْ سَيِّئَاتُهُمْ،

अल मुकफ़'फ्री अन्हुम सय्यी-आतुहुम

and whose offenses are pardoned by You,

وَاجْعَلْ فِي مَا تَقْضِي وَتُقَدِّرُ

वज-अल फ़ीमा ताक़'ज़ी व तुक़द'दिरू

and that You, also within Your determined decisions,

أَنْ تُطِيلَ عُمْرَي

अन तुतीला उमरी

that You decide for me a long life,

وَتُوَسِّعَ عَلَيَّ رِزْقِي،

व तुवस'सिया’ अलय्या रिज़्की

and expansive sustenance,

وَتُؤَدِّيَ عَنِّي أَمَانَتِي وَدَيْنِي،

व तू-अद'दिया अन्नी अमानती व दयनी

and that You help me fulfill my trusts and settle my debts,

آمِين رَبَّ الْعَالَمِينَ.

आमीन या रब्बल आलामीन

Repond to me; O the Lord of the worlds.

c) या अलीयु या अज़ीम  يَا عَلِيُّ يَا عَظِيمُ،    Mp3

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है

O the Most High; O the All-great;

या अलिय्यु या अज़ीम

يَا عَلِيُّ يَا عَظِيمُ،

O the All-forgiving; O the All-merciful

या ग़फूरू या रहीम

يَا غَفُورُ يَا رَحِيمُ،

You are the All-great Lord

अंतर रब्बुल अजीमुल

 أَنْتَ الرَّبُّ الْعَظِيمُ

Like Whom there is nothing

अल लज़ी लाय्सा कमिस'लिही शय-उन

الَّذِي لَيْسَ كَمِثْلِهِ شَيْءٌ

and He is the All-hearing, the All-aware;

व हुवस समी-उल बसीर

وَهُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ،

and this is a month that You have glorified and ennbled,

व हाज़ा शःरून अज़ज़म'तहु व कर'रम'तहु

وَهذَا شَهْرٌ عَظَّمْتَهُ وَكَرَّمْتَهُ

and honored and preferred to the other months,

व शर'रफ़'तहु व फ़ज”ज़ल'तहु अलाश शुहूरी

وَشَرَّفْتَهُ وَفَضَّلْتَهُ عَلَى الشُّهُورِ،

it is the month that You imposed upon me to observe fasting in it,

व हवाश शःरुल लज़ी फ़राज़”ता सिया'महू अलय्या

وَهُوَ الشَّهْرُ الَّذِي فَرَضْتَ صِيَامَهُ عَلَيَّ،

it is the month of Rama€‘n during which You revealed the Qur'‘n

व शहरू रम'ज़ानल लज़ी अन्ज़लता फ़ीहिल क़ुर-आना

وَهُوَ شَهْرُ رَمَضَانَ الَّذِي أَنْزَلْتَ فِيهِ الْقُرْآنَ

as guidance for people and clear proofs on true guidance and distinction (between the right and the wrong);

हुदन लिन नासी व बय्यी'नातिम मिनल हुदा वल फुर'क़ान

هُدَىً لِلنَّاسِ وَبَيِّنَاتٍ مِنَ الْهُدَى وَالْفُرْقَانِ

and You decided the Grand Night to be in it,

व जा-अलता फ़ीही लै'लातल कद्र

وَجَعَلْتَ فِيهِ لَيْلَةَ الْقَدْرِ

and You have decided it to be more favorable that one thousand months.

व जा-अल्तहा खै'रन मिन अल्फ़ी शहर

وَجَعَلْتَهَا خَيْراً مِنْ أَلْفِ شَهْرٍ،

So, O the Lord of graces; and none can ever do favor to You;

फ़ा-या ज़ल मन्नी व ला यु'मन्नू अलयका

فَيَا ذَا الْمَنِّ وَلا يُمَنُّ عَلَيْكَ

Please do me a favor by releasing me from the Fire and by including me with those to whom You do this favor,

मुन्ना अलय्या बी-फ़काकी रक़ा'बती मिनन नारी फ़ी'मन ता'मुन्नू अलय्ही

مُنَّ عَلَيَّ بِفَكَاكِ رَقَبَتِي مِنَ النَّارِ فِي مَنْ تَمُنُّ عَلَيْهِ

and allow me to enter Paradise;

व अद'खिलनिल जन्नता

وَأَدْخِلْنِي الْجَنَّةَ

on account of Your mercy; O the most Merciful of all those who show mercy.

बी-रह’मतिका या अर'हमर राहिमीन

بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ.


 

दुआए अल-हज   Mp3

अल-कुल'लियानी ने किताब अल-काफ़ी में अबू बसीर से रिवायत की है की ईमाम अल-सादीक़ (अ:स) रमज़ान में यह दुआ पढ़ा करते थे! :

 

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है

اللّهُمَّ إنِّي بِكَ وَمِنْكَ أَطْلُبُ حَاجَتِي،

अल्लाहुम्मा इन्नी बिका व मिनका अत’लुबु हा'जती

O Allah: From You and by You, I beseech for settling my need,

وَمَنْ طَلَبَ حَاجَةً إلَى النَّاسِ

व मंत-अलाबा हा'जतन इलन नास

If others beg people for settling their needs,

فَإنِّي لا أَطْلُبُ حَاجَتِي إلا مِنْكَ

फ़ा-इन्नी ला अत’लुबु हा'जती इल्ला मिनका

I ask none except You for settling my need;

وَحْدَكَ لا شَرِيكَ لَكَ،

वह’दका ला शरीका लका

From You alone, since You have no partner with You

وَأَسْأَلُكَ بِفَضْلِكَ وَرِضْوَانِكَ

व अस-अलुका बी-फ़जलिका व रिज़'वानिका

and I thus implore You in the name of Your favor and Your pleasure,

أَنْ تُصَلِّيَ عَلَى مُحَمَّدٍ وَأَهْلِ بَيْتِهِ

अन तू'सल्ली अला मुहम्मदीन व अहली बय्तिही

to send blessings upon Muhammad and his Household,

وَأَنْ تَجْعَلَ لِي فِي عَامِي هذَا إلَى بَيْتِكَ الْحَرَامِ سَبِيلاً

व अन तज-अला ली फ़ी आमी हाज़ा इला बयतिकल हराम सबीलन

And to choose for me a way to Your Holy House this year:

حِجَّةً مَبْرُورَةً مُتَقَبَّلَةً زَاكِيةً خَالِصَةً لَكَ

हज'जतन मबरू'रतन मुताक़ब'बलातन ज़ाकि'यतन ख़ाली'सतन लका

A pilgrimage that is admitted, accepted, pure, and sincerely for You

تَقَرُّ بِهَا عَيْنِي،

तक़र'रुबिहा अयनी

By which You delight me,

وَتَرْفَعُ بِهَا دَرَجَتِي،

व तरफ़ा-उ’ बिहा दराजाती

And raise my rank with You

وَتَرْزُقَنِي أَنْ أَغُضَّ بَصَرِي،

व तर'ज़ुक़नी अन अग़'हुज़”ज़” अ बस’अरी

And to confer upon me with the grace of making me cast my sight down (against what is illegal for me to look at)

وَأَنْ أَحْفَظَ فَرْجِي،

व अन अह’फ़ज़ा फ़र्जी

And making me act chastely

وَأَنْ أَكُفَّ بِهَا عَنْ جَمِيعِ مَحَارِمِكَ

व अन अकुफ़'फ़ा बिहा अन जमी-इ’ म्हारी'मिका

And making me stop committing any deed that You have deemed unlawful

حَتَّى لا يَكُونَ شَيْءٌ آثَرَ عِنْدِي مِنْ طَاعَتِكَ وَخَشْيَتِكَ

हत्ता ला यकूना शय-उन असर इंदी मिन ता-अतिका व खश'यतिका

So that nothing will be more preferred in my sight than the obedience to You and the fear of You

وَالْعَمَلِ بِمَا أَحْبَبْتَ،

वल अमली बीमा अह’बब्ता

And doing all that which You love,

وَالتَّرْكِ لِمَا كَرِهْتَ وَنَهَيْتَ عَنْهُ،

वत'तर्की लीमा करिहता व नहयता अन्हु

And avoiding all that which You have detested and warned against.

وَاجْعَلْ ذلِكَ فِي يُسْرٍ وَيَسَارٍ وَعَافِيَةٍ وَمَا أَنْعَمْتَ بِهِ عَلَيَّ،

वज-अल ज़ालिका फ़ी युस्रिन व यसारिन व आफ़ि'यतिन व मा अन-अमता बिही अलय्या

And (please) make all that take place with easiness, lenience, and good health as well as the grave that You have bestowed upon me.

وَأَسْأَلُكَ أَنْ تَجْعَلَ وَفَاتِي قَتْلاً فِي سَبِيلِكَ

व अस'अलुका अन तज-अला वफ़ा'ती क़त्लन फ़ी सबीलिका

And I beseech You to cause me to die as martyr for Your sake,

تَحْتَ رَايَةِ نَبِيِّكَ مَعَ أَوْلِيَائِكَ،

तह’ता रा'यति नबी'यिका मा-अ’ औलिया-इका

Under the pennon of Your Prophet and in the line of Your intimate servants.

وَأَسْأَلُكَ أَنْ تَقْتُلَ بِي أَعْدَاءَكَ وَأَعْدَاءَ رَسُولِكَ،

व अस'अलुका अन ताक़'तुला बी आ’-दा-इका व ’-दा-अ रसूलिका

And I ask You to make me the means of killing Your enemies and the enemies of Your Messenger.

وَأَسْأَلُكَ أَنْ تُكْرِمَنِي بِهَوَانِ مَنْ شِئْتَ مِنْ خَلْقِكَ

अस-अलुका अन तुक्री'मणी बी-हवानी मन शिया-ता मिन ख़ल'क़िका

And I ask You to honor me through humiliating any one of Your created beings that You choose,

وَلا تُهِنِّي بِكَرَامَةِ أَحَدٍ مِنْ أَوْلِيَائِكَ.

व ला तुहिन'नी बी-करामाती अहदीन मिन औलिया-इका

And not to humiliate me through honoring any of Your intimate servants.

اللّهُمَّ اجْعَلْ لِي مَعَ الرَّسُولِ سَبِيلاً،

अल्लाहुम'मज-अल ली मा-अर रसूली सबीला

O Allah: find me a way with the Messenger.

حَسْبِيَ اللّهُ، مَا شَاءَ اللّهُ.

हस्बियल'लाहू माशा-अल्लाह

Allah is Sufficient unto me! Only that which Allah wants shall take place.

 

यह दुआ, दुआए अल-हज्ज कहलाती है! सैय्यद इब्ने तावूस ने किताब अल-इक़बाल में फ़रमाया है की ईमाम अल-सादीक़ (अ:स) रमज़ान में अपनी मगरिब की नमाज़ के बाद रोज़ाना यह दुआ पढ़ा करते थे! इसके अलावा भी शेख़ अल-कफ़'अमी ने अपनी किताब 'अल-बलद'अल-आमीन' में रमज़ान महीने में रोज़ाना ईस दुआ क़ो पढ़ने की ताकीद की है, ख़ासकर पहली रमज़ान क़ो!